देहरादून में मौत बनकर पलटा खाद से भरा कंटेनर
जिस घर में खुशियां बांटने जा रहे थे, वहां पहुंचने से पहले ही उजड़ गया अपना संसार
देहरादून। राजधानी देहरादून के मोहब्बेवाला चौक पर हुए एक भीषण सड़क हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। सहारनपुर से देहरादून आ रही आई-20 कार के ऊपर खाद से भरा एक भारी-भरकम कंटेनर अचानक पलट गया। कंटेनर के नीचे कार पूरी तरह दब गई। इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों और कार चालक समेत चार लोगों की जान चली गई, जबकि कार में सवार छह वर्षीय मासूम बच्चा घायल हो गया। हादसे में बच्चे के सुरक्षित बच जाने को राहत की बात माना जा रहा है, लेकिन कुछ ही पलों में उसके सिर से मां, पिता और दादी का साया उठ गया।
जानकारी के अनुसार सहारनपुर निवासी कपूर परिवार देहरादून आ रहा था। बताया जा रहा है कि परिवार के सदस्य मिश्रेष कपूर के छोटे भाई की गर्भवती पत्नी को देखने के लिए देहरादून आ रहे थे। परिवार में आने वाले नए मेहमान को लेकर खुशियों और उत्साह का माहौल रहा होगा, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर उनके जीवन का आखिरी सफर साबित होगा और परिवार की खुशियां हमेशा के लिए मातम में बदल जाएंगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मोहब्बेवाला चौक पर सहारनपुर की ओर से आ रही आई-20 कार के बराबर से खाद से भरा कंटेनर गुजर रहा था। इसी दौरान रंबल स्ट्रिप पार करने के बाद अचानक कंटेनर अनियंत्रित हो गया और सीधे कार के ऊपर पलट गया। भारी-भरकम कंटेनर के नीचे कार पूरी तरह दब गई। हादसा इतना भयावह था कि कार में सवार लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।
कंटेनर के पलटते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद लोग तत्काल मदद के लिए दौड़े, लेकिन कार कंटेनर के नीचे बुरी तरह फंसी हुई थी। भारी वजन के कारण स्थानीय लोग चाहकर भी कार में फंसे लोगों को बाहर नहीं निकाल सके। देखते ही देखते घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और पुलिस तथा आपातकालीन सेवाओं को सूचना दी गई।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंच गईं। कार में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। कंटेनर का वजन अधिक होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य काफी चुनौतीपूर्ण था। सबसे पहले हाइड्रा मशीन की मदद से कंटेनर को कार के ऊपर से हटाया गया। इसके बाद कार की बुरी तरह क्षतिग्रस्त छत को काटने के लिए दो कटर मशीनों का इस्तेमाल किया गया।
रेस्क्यू टीम ने काफी मशक्कत के बाद कार में फंसे छह वर्षीय माहेर कपूर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बच्चे को मामूली चोटें आई थीं। करीब 20 मिनट तक चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन में जब मासूम को सुरक्षित बाहर निकाला गया तो मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली और पुलिस तथा फायर ब्रिगेड की टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए तालियां बजाईं।
बच्चे के सुरक्षित निकलने के बाद घटनास्थल पर मौजूद लोगों को उम्मीद जगी कि कार में फंसे अन्य लोग भी बच जाएंगे, लेकिन कुछ ही देर बाद यह उम्मीद निराशा में बदल गई। रेस्क्यू टीम ने कार में फंसे अन्य चार लोगों को गंभीर हालत में बाहर निकाला और दो एंबुलेंस की मदद से तत्काल कोरोनेशन अस्पताल पहुंचाया। हालांकि अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद चारों को मृत घोषित कर दिया।
हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान मिश्रेष कपूर (38), उनकी पत्नी निशा आनंद कपूर (38), मां किरण कपूर (63), निवासी गोकुल धाम कॉलोनी, सहारनपुर तथा कार चालक नीरज निवासी सहारनपुर के रूप में हुई है। हादसे में मिश्रेष कपूर का छह वर्षीय बेटा माहेर घायल हुआ है।
एक ही परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ मौत से सहारनपुर स्थित उनके परिवार और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। सबसे मार्मिक पहलू यह है कि जिस मासूम के साथ उसके माता-पिता और दादी देहरादून आ रहे थे, वही बच्चा अब इस हादसे में अपने परिवार के तीन अहम सदस्यों को खो चुका है।
हादसे के समय कंटेनर के ठीक पीछे टायरों से लदा एक अन्य लोडर वाहन भी चल रहा था। जैसे ही कंटेनर कार के ऊपर पलटा, लोडर चालक ने तत्काल ब्रेक लगा दिए। इससे लोडर वाहन कंटेनर से टकराने से बाल-बाल बच गया। यदि चालक समय रहते ब्रेक नहीं लगाता तो हादसा और भी गंभीर हो सकता था।
हादसे के बाद पुलिस ने यातायात सुचारु कराने के लिए लोडर वाहन को सड़क से हटाने का प्रयास किया, लेकिन वह भी स्टार्ट नहीं हो पाया। आखिरकार लोगों की मदद से उसे धक्का देकर सड़क के किनारे किया गया।
मोहब्बेवाला चौक का यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। रंबल स्ट्रिप पार करने के बाद आखिर कंटेनर किस वजह से अनियंत्रित होकर कार पर पलटा, यह जांच का विषय है। फिलहाल इस हादसे ने एक परिवार को ऐसा गहरा जख्म दिया है, जिसकी भरपाई शायद कभी संभव नहीं होगी।
जिस परिवार के सदस्य अपनों के घर में आने वाली नई खुशियों में शामिल होने के लिए निकले थे, उन्हें क्या पता था कि उनका यह सफर कभी खत्म न होने वाला दर्द दे जाएगा। एक ओर परिवार में नए मेहमान के आने की उम्मीद थी, तो दूसरी ओर एक मासूम के जीवन से उसके माता-पिता और दादी हमेशा के लिए दूर हो गए।




