छात्रों के लिए प्रेरणा, आत्मबल और करियर निर्माण की नई राह दिखाने जरिया बनी ‘प्रोग्रेसिव कम्युनिटी’
देहरादून। प्रोग्रेसिव कम्युनिटी की ओर से आयोजित दूसरे प्रतिभा सम्मान समारोह में छात्रों को न केवल सम्मानित किया गया, बल्कि उन्हें भविष्य की राह दिखाने का सार्थक प्रयास भी किया गया।
प्रोग्रेसिव कमेटी देहरादून द्वारा संस्कृति विभाग प्रेक्षागृह, देहरादून में यह कार्यक्रम अत्यंत भावनात्मक, प्रेरणादायी और गरिमामयी माहौल में संपन्न हुआ। जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभाओं को एवं छात्राओं को सम्मानित किया गया
समारोह की अध्यक्षता सुभारती विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉक्टर हिमांशु ने की। उन्होंने मंच से छात्रों को कड़ी मेहनत, ईमानदारी और सेवा भावना के साथ देश और समाज के लिए कार्य करने की प्रेरणा दी।
मुख्य अतिथि दर्जाधारी राज्य मंत्री देशराज करणवाल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा आज के समय की अनिवार्यता है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. अनुभव अग्रवाल ने बालिका शिक्षा पर विशेष बल देते हुए कहा कि समाज में प्रगति लाने के लिए बालिकाओं को अधिक से अधिक शिक्षा के अवसर प्रदान करना आवश्यक है। कार्यक्रम का संचालन डॉ रियाज उल हसन सिद्दीकी व डॉक्टर जमशेद उस्मानी ने अत्यंत कुशलता और सरस भाषा में किया।
उत्तराखंड बर काउंसिल की पूर्व चेयरपर्सन एडवोकेट रजिया बेग ने बालिका शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला.
इस आयोजन की विशेष उपलब्धि यह रही कि विभिन्न क्षेत्रों में विशेष योगदान देने वाले व्यक्तियों एवं विभिन्न बोर्डों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 300 छात्रों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने से न केवल छात्रों के आत्मविश्वास में वृद्धि हुई, बल्कि उनके परिवारों को भी गर्व की अनुभूति हुई। इसके अतिरिक्त, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल छात्रों को भी विशेष रूप से नवाज़ा गया।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित करियर काउंसलिंग सत्र छात्रों के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध हुआ। इसमें विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं, सेना, पुलिस और सिविल सेवाओं के लिए विशेषज्ञ ने छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं, प्रवेश प्रक्रियाओं और करियर निर्माण की तकनीकों पर गहन मार्गदर्शन प्रदान किया।
डॉ. तंजीम अली (पीसीएस) ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी और मानसिक रणनीति पर प्रकाश डाला।
एक ऐतिहासिक पहल बना यह आयोजन
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। मंच पर छाया उत्साह, जोश और उम्मीदों का वातावरण यह स्पष्ट कर रहा था कि प्रोग्रेसिव कम्युनिटी देहरादून द्वारा आयोजित यह समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य निर्माण की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम था।
डॉ. अफरोज इकबाल ने अपने व्याख्यान की शुरुआत छात्रों के सबसे आम सवाल से की – “मेरे लिए सही करियर क्या है?” उन्होंने बताया कि आज के दौर में अनगिनत करियर विकल्प हैं, जो अक्सर छात्रों को भ्रमित कर देते हैं। इसी भ्रम को दूर करने और छात्र की स्वाभाविक प्रतिभा, रुचि और व्यक्तित्व के अनुसार सही दिशा दिखाने का काम एक करियर गाइड करता है।
उन्होंने कहा, “सफलता सिर्फ कड़ी मेहनत से नहीं मिलती, बल्कि सही दिशा में की गई कड़ी मेहनत से मिलती है। आपके सपने बड़े होने चाहिए, क्योंकि आपकी सोच ही आपकी सीमा तय करती है। यदि आप छोटा सोचेंगे, तो आपकी कोशिशें भी छोटी होंगी।”
‘बड़ी सोच का जादू’ और जीवन में इसका प्रभाव
डॉ. इकबाल के व्याख्यान का एक बड़ा हिस्सा डेविड जे. श्वार्ट्ज की विश्व प्रसिद्ध किताब “द मैजिक ऑफ थिंकिंग बिग” (The Magic of Thinking Big) के सिद्धांतों पर आधारित था। उन्होंने समझाया कि यह किताब सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली टूल है जो किसी भी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकता है।
उन्होंने किताब से कुछ प्रमुख बातें साझा कीं:
विश्वास की शक्ति: “सफलता का पहला नियम है – खुद पर और अपनी क्षमताओं पर विश्वास करना। अगर आप मन में यह विश्वास नहीं करते कि आप यह कर सकते हैं, तो आप इसे कभी नहीं कर पाएंगे।”
नकारात्मकता को खत्म करें: उन्होंने छात्रों को “एक्सक्यूसाइटिस” (Excusitis) यानी बहाने बनाने की बीमारी से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “सफलता पाने वाले लोग बहाने नहीं, बल्कि रास्ते खोजते हैं।”
डर पर काबू पाएं: डॉ. इकबाल के अनुसार, डर का सबसे अच्छा इलाज एक्शन है। जिस काम से डर लगता है, उसे करने के लिए एक छोटा कदम उठाएं। धीरे-धीरे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और डर खत्म हो जाएगा।
कैसे बढ़ाएं आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति (Inner Strength)?
कार्यक्रम का सबसे इंटरैक्टिव हिस्सा वह था जब डॉ. इकबाल ने छात्रों को आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति बनाने के व्यावहारिक तरीके बताए। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास कोई जन्मजात गुण नहीं है, इसे विकसित किया जा सकता है।
उनके द्वारा दिए गए कुछ प्रमुख टिप्स:
अपनी ताकत को पहचानें: अपनी कमजोरियों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, अपनी शक्तियों को पहचानें और उन्हें और बेहतर बनाएं।
सकारात्मक लोगों के साथ रहें: आपकी संगति का आपके विचारों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे लोगों के साथ रहें जो आपको प्रेरित करते हैं, न कि निराश।
छोटे लक्ष्य बनाएं और उन्हें पूरा करें: जब आप छोटे-छोटे लक्ष्य हासिल करते हैं, तो आपका आत्मविश्वास बढ़ता है, जो आपको बड़े लक्ष्यों की ओर ले जाता है।
ज्ञान ही शक्ति है: अपने चुने हुए क्षेत्र के बारे में लगातार सीखते रहें। जितना अधिक आप जानेंगे, उतना ही अधिक आप आत्मविश्वासी महसूस करेंगे।
छात्रों के सवालों और डॉ. इकबाल के जवाबों से गूंजा हॉल
व्याख्यान के बाद एक विस्तृत प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने करियर चयन, असफलता के डर, माता-पिता के दबाव और भविष्य की अनिश्चितताओं से जुड़े कई तीखे और प्रासंगिक सवाल पूछे। डॉ. इकबाल ने हर सवाल का धैर्यपूर्वक और व्यावहारिक समाधान के साथ जवाब दिया, जिससे छात्रों को एक नई स्पष्टता और ऊर्जा मिली।
एक छात्र ने पूछा, “अगर हम अपने सपनों का पीछा करते हुए असफल हो गए तो?” इस पर डॉ. इकबाल ने जवाब दिया, “असफलता अंत नहीं है, यह सीखने की प्रक्रिया का एक हिस्सा है। असली असफलता कोशिश न करना है।”
अंत में, प्रोग्रेसिव कम्युनिटी के आयोजकों ने डॉ. अफरोज इकबाल का धन्यवाद किया और कहा कि यह कार्यक्रम न केवल छात्रों के लिए, बल्कि उन सभी के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा जो अपने जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते हैं। कार्यक्रम से बाहर निकलते छात्रों के चेहरों पर आत्मविश्वास और उम्मीद की एक नई चमक साफ देखी जा सकती थी।





